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Tuesday, March 29, 2022

प्रेम लगन

मुझे खास बोलते हैं वो,
कोई खास नही होता।

मेरे बिना नहीं रह पाएंगे,
इस एहसास  पे,
खुद पे   गुमान  नहीं होता।
जैसे  सुबह के बाद शाम है,
हर खास के बाद ,फिर कोई खास हैं।

खास न बना मुझको, 
बस लगन वाली प्रीत  हूं ,
क्योंकि खास से खांक तक में, 
 बारीक सी सरहद हैं,
जो बिना पहरेदारी  की चलती हैं।

चल इतना ही सुकून बहुत हैं,
की तुझको  मदहोश कर जाती हू।
मेरे चेहरे से होकर हवा ,
तुमको भी छू जाती हैं,
चांद को देख कर,
तेरी उमर चांदी 
मेरी सादगी में , जवां हो जाती है,
 हर सांस में मिल जाए,
उसके सिलवटों में सिमटा,
दूर से भी स्पर्श मिले हाथों को 
ये प्रेम  की लगन  है, 
जो बिना छुए,
बिना बोले,
हर हाल में  धड़कन बनकर 
दिल के लहू में बहता  हैं।।