चाँद तनहा है, आसमा तनहा
चाँद तनहा है , आसमा तनहा .....
बात निकली है जो दिल की तो दिल भी तनहा है |
चाँद तनहा है .................
इश्क की राह पर चल रहे है जो कदम ,
चल रहे है साथ मगर फीर भी तनहा .......
चाँद तनहा है ............
आज भी हुश्न को देखकर शायरी कहते है क्या ?
अब तो ग़ालिब की हवेली में ग़ालिब तनहा ............
चाँद तनहा है ...........
ओश की बूंद पर गर्म रेतो के निशा.......
तप रही है जम़ी प्यार की , और ख्वाईशे तनहा ......
चाँद तनहा है ...................

Itna khalipan accha nahi hai "v".
ReplyDeletevaise ghazal acchi hai --Tap rahi hai jameen pyar ki .......Apurva
ye khalipan nhi hai ye aajkal ke risto ke bare me h ai ki sath hoker v log sath nhi hote?
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