"क्या होगा क्या होगा "धरती तों बट जाएगी पर नीलगगन का क्या होगा ,
पानी पानी लेते रहोगे तों पानी की प्यास का क्या होगा
कब तक खेलतें रहोगें संपदा - ऐ धरती से
जब खेलने को उकलाई संपदा तों
धरती वासियों तुम्हारा क्या होगा
खूब कर रहें हम विज्ञान विज्ञान हैं
तकनिकी इजात पे कितना अभिमान हैं
लेकिन क्या ये भी तुम्हें गुमान हैं
हर तकनिकी साधन को इंसानी हाथ का इंतजार है
हवां ,पानी और आकाश गंगा के बिना ,
इंसानी दिमाग तेरी क्या पहचान हैं !
किसी को पेट में अनाज की आग है
और अधिक्तम घरों में सड़ता अनाज कर रहा विकराल हैं
जब वादियों का सारा धन यु ही होता रहा बर्बाद
तों आने वाली नस्लों का क्या होगा!
सूरदास ,कबिरदास के दोहों से
खतम कर रहा समाज अपनी जानपहचान हैं
क्या कोला , पिज्जा मिक्की माउस से ही
ज्ञान्वर्धित हो कर बाल जगत
दे पायेगा सांसद को का सही पहचान
जब संस्कृति से हम हो रहे दूर हैं
तों भारत में लगे महान शब्द का क्या होगा
आपदाओं की बिगड़ती शक्ल कर रही ऐलान हैं
जाने अभी कितनी हैं ऐसी आपदायें
जिनकी शक्लों सूरत से हम अनजान हैं
धरती तों हो ही रही हैं त्राहिमाम
अब चाँद पर भी है कहर की बारी
जाने बर्फिलें दुतों अब तुम्हारा क्या होगा
हम कर तो रहे है धन अर्जित
लेकिन जब उठ जाएँगी संपदा की डोली तों
पूंजीपतियों तुम्हारा क्या होगा ...
हैं वक्त अभी भी सचेत लों
चिंतन विन्तन करके नगर ढिढोरा पिटों ......
समझों इसे आकाशवाणी "क्या होगा क्या होगा "
आओं संपदा की बैंक में जीवन जीवंत रहें विमां का अभियान चलायें !!

सामयिक और संजीदा शब्द..
ReplyDeleteutam-***
ReplyDelete